संस्कृत श्लोक

“काक चेष्टा, बको ध्यानं, श्वाननिद्रा तथैव च।  अल्पहारी, गृहत्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणम्॥”  इसका अर्थ है कि एक विद्यार्थी को कौए की तरह चेष्टाशील, बगुले की तरह ध्यान केंद्रित करने वाला, कुत्ते की तरह अल्प निद्रा लेने वाला, कम खाने वाला और घर के मोह को त्यागने वाला होना चाहिए।    काक चेष्टा (कौए की तरह प्रयासशीलता) कौआ बहुत ही सतर्क, बुद्धिमान और परिश्रमी पक्षी होता है। उसकी जिज्ञासा और लगातार प्रयास करने की प्रवृत्ति हमें सिखाती है कि हमें अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर मेहनत करनी चाहिए।  धैर्य और परिश्रम: विद्यार्थी को कभी हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि

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